सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई स्लम पुनर्वास योजना को हरी झंडी, SRA के नोटिस को मिली मान्यता
मुंबई के भारत एकता सोसायटी स्लम क्षेत्र के पुनर्विकास पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला। जानें क्यों खारिज हुई निवासियों की याचिका और कैसे लाभान्वित होंगे 2600 से अधिक परिवार।
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सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई स्लम पुनर्वास योजना को दी मंजूरी, कहा- “याचिकाकर्ताओं ने की देरी की रणनीति”
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मुंबई के भारत एकता सोसायटी स्लम क्षेत्र के पुनर्विकास को लेकर SRA (स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी) द्वारा जारी नोटिस को वैध ठहराया है। जस्टिस सुधांशु धुलिया और जस्टिस कृष्णन विनोद चंद्रन की पीठ ने निवासियों की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह परियोजना 2,625 पात्र स्लम निवासियों के हित में है और देरी से चुनौती देने का प्रयास “विलंब की रणनीति” है।
मामले की पृष्ठभूमि: 2019 का नोटिस और विवाद
2019 का पहला नोटिस: SRA ने महाराष्ट्र स्लम एक्ट, 1971 के तहत निवासियों को 15 दिन में परिसर खाली करने का आदेश दिया।
AGRC में चुनौती: याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि भूमि MHADA लेआउट है और SRA के बजाय MHADA को पुनर्विकास करना चाहिए। AGRC ने 2019 में यह दलील खारिज की।
2022 का दूसरा नोटिस: SRA ने 48 घंटे में खाली करने का नया नोटिस जारी किया, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने 2023 में खारिज किया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु
AGRC के आदेश को अंतिम माना: याचिकाकर्ताओं ने 2019 के AGRC के आदेश को चुनौती नहीं दी, जिससे वह अंतिम हो गया।
MHADA लेआउट का दावा खारिज: कोर्ट ने कहा कि यह क्षेत्र ‘सेंसस्ड स्लम’ है, जिसे 1981 में ही चिह्नित किया गया था। अलग अधिसूचना की आवश्यकता नहीं।
पुनर्विकास योजना वैध: SRA ने MHADA से NOC प्राप्त किया है और 70% निवासियों की सहमति से परियोजना शुरू की गई।
याचिकाकर्ताओं पर आरोप: कोर्ट ने कहा कि कुछ याचिकाकर्ता “अयोग्य स्लम निवासी” हैं और वे केवल बड़े आवास पाने के लिए MHADA का हवाला दे रहे थे।
न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ
जस्टिस धुलिया: “यह परियोजना सैकड़ों परिवारों के जीवन स्तर को सुधारेगी। याचिकाकर्ताओं ने जानबूझकर विलंब किया।”
जस्टिस चंद्रन: “सेंसस्ड स्लम के लिए अलग अधिसूचना की आवश्यकता नहीं। SRA का नोटिस पूर्णतः कानूनी है।”
क्या है ‘सेंसस्ड स्लम’?
मुंबई के विकास नियमों (DCR) के अनुसार, सेंसस्ड स्लम वे क्षेत्र हैं जो 1976, 1980, 1985 या 1995 से पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हैं। इन्हें पुनर्विकास के लिए अलग अधिसूचना की आवश्यकता नहीं होती।
परियोजना का महत्व
लाभार्थी: 2,625 पात्र परिवारों को नए आवास मिलेंगे।
प्रगति: परियोजना का पहला चरण पूरा हो चुका है, दूसरे चरण का कार्य रुका हुआ था।
MHADA का रुख: MHADA ने कोर्ट में कहा कि यह उनकी संपत्ति है, लेकिन यह स्लम क्षेत्र है, इसलिए SRA को NOC दिया गया।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष
उनका दावा था कि वे MHADA के किरायेदार हैं और पुनर्विकास MHADA को करना चाहिए।
MHADA लेआउट के तहत उन्हें बड़े आवास मिलते, जबकि SRA योजना में छोटे फ्लैट हैं।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
अधिवक्ता रिया मेहता: “यह फैसला शहरी विकास और स्लम निवासियों के हित के बीच संतुलन स्थापित करता है।”
नगर योजनाकार डॉ. राजेश पाटिल: “मुंबई जैसे महानगर में स्लम पुनर्विकास सामाजिक-आर्थिक प्रगति के लिए जरूरी है।”
निष्कर्ष: सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से मुंबई के स्लम क्षेत्रों के पुनर्विकास को गति मिलेगी। हालाँकि, यह मामला सरकारी योजनाओं और नागरिक अधिकारों के बीच तालमेल की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
✍️ लेखक: Shruti Mishra, वरिष्ठ न्यायिक संवाददाता
स्रोत: सुप्रीम कोर्ट का आदेश , भारत एकता सोसायटी मामला