न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने हाई कोर्ट के आदेश को ख़ारिज करने से इंकार कर दिया बेंच ने कहा की ये याचिका ख़ारिज की जाता है उच्च न्यायालय के आदेश में सभी तथ्यों पर उचित महत्व दिया गया है। एक गंभीर आपराधिक अपराध या गंभीर आर्थिक अपराध या इसके लिए कहने के लिए अपराध जो संस्थानों के वित्तीय हालत गंभी रूप से ख़राब करने की संभावना रखता है, उसको यह कहते हुए नहीं रद्द किया जाना चाहिए कि मुकदमे में देरी है या सिद्धांत यह है कि जब मामला निपट गया है तो इसे रद्द कर देना चाहिए ताकि प्रणाली पर सीधा हमला न हो।