Supreme Court Mediation वकीलों के बीच विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अनूठा फैसला: माफीनामा और समझौते को मान्यता
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वकीलों के बीच झगड़े पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा माफीनामा और समझौते पर ?
2025 में सुप्रीम कोर्ट ने माफीनामा और समझौतेवकीलों के बीच हिंसक विवाद से जुड़े एक अनूठे मामले में फैसला सुनाया। यह मामला तमिलनाडु के कोडाइकनाल की अदालत में कार्यरत दो वकीलों, रमेश कुमारन और एक अन्य के बीच 2017 में हुए झगड़े से जुड़ा था। कोर्ट ने आपसी माफीनामा और समझौते को आधार बनाते हुए दोनों पक्षों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी।
केस का संक्षिप्त विवरण
अपीलकर्ता: रमेश कुमारन और उनके पिता
प्रतिवादी: कोडाइकनाल पुलिस और दूसरा वकील
केस नंबर: क्रिमिनल अपील संख्या 1318/2025 (2025 INSC 405)
IPC धाराएं: 294(b), 323, 506(1)
दिसंबर 2017 में दोनों वकीलों के बीच कोडाइकनाल झील के पास झगड़ा हुआ, जिसमें दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ FIR दर्ज की। रमेश कुमारन ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी ने उन पर शराब पीकर हमला किया, जबकि प्रतिवादी ने दावा किया कि रमेश ने गाली-गलौज की। हाई कोर्ट ने FIR बरकरार रखी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने माफीनामा और समझौते के आधार पर दोनों FIR रद्द कर दीं।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की मुख्य बातें
आपसी माफी: प्रतिवादी वकील ने लिखित में माफी मांगी और भविष्य में ऐसा व्यवहार न दोहराने का वचन दिया।
अदालत की चेतावनी: अपीलकर्ता रमेश ने कोर्ट को आत्महत्या की धमकी दी, जिसके बाद कोर्ट ने उनसे माफी मांगवाई।
FIR रद्दीकरण: कोर्ट ने आर्टिकल 142 के तहत दोनों FIR (499/2017 और 500/2017) रद्द कर दीं, क्योंकि मामला 7 साल पुराना था और दोनों पक्ष समझौते के इच्छुक थे।
केस से जुड़े सबक
वकीलों की जिम्मेदारी: कोर्ट ने कहा कि वकीलों को पेशेवर आचार का पालन करना चाहिए और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाना चाहिए।
मध्यस्थता का महत्व: लंबे समय से लंबित मामलों में अदालत की मध्यस्थता से समय और संसाधन बचाए जा सकते हैं।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के जरिए कानूनी पेशे की गरिमा बनाए रखने का संदेश दिया है। हालांकि, अपीलकर्ता की कोर्ट को धमकी देने की घटना गंभीर है, जिस पर कोर्ट ने उदारता दिखाते हुए केवल माफी मांगने तक सीमित रखा। यह फैसला आपसी माफीनामा और समझौते के महत्व को रेखांकित करता है।
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