सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अंग्रेजी नहीं पास करने वाले छात्र को मिली B.A.M.S. डिग्री की मान्यता
मध्य प्रदेश के ज़ैद शेख की 6 साल की मेहनत रंग लाई, कोर्ट ने कहा— “अदालत की गलती से किसी का नुकसान नहीं होना चाहिए” नई दिल्ली, 18 मार्च 2025 — सुप्रीम कोर्ट ने आज शिक्षा के अधिकार पर एक मिसाल कायम करते हुए मध्य प्रदेश के ज़ैद शेख को उनकी B.A.M.S. (आयुर्वेदिक मेडिसिन) डिग्री पूरी…
मध्य प्रदेश के ज़ैद शेख की 6 साल की मेहनत रंग लाई, कोर्ट ने कहा— “अदालत की गलती से किसी का नुकसान नहीं होना चाहिए”
नई दिल्ली, 18 मार्च 2025 — सुप्रीम कोर्ट ने आज शिक्षा के अधिकार पर एक मिसाल कायम करते हुए मध्य प्रदेश के ज़ैद शेख को उनकी B.A.M.S. (आयुर्वेदिक मेडिसिन) डिग्री पूरी करने का आदेश दिया। यह फैसला तब आया जब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ज़ैद के खिलाफ फैसला सुनाया था, क्योंकि उन्होंने 12वीं कक्षा में अंग्रेजी विषय पास नहीं किया था।
केस की पृष्ठभूमि: 6 साल का संघर्ष
2008: ज़ैद ने मध्य प्रदेश संस्कृत बोर्ड से 12वीं पास की, लेकिन अंग्रेजी विषय नहीं लिया।
2008 में ही: उन्हें नीमथुर के एक आयुर्वेदिक कॉलेज में B.A.M.S. में प्रवेश मिला, जहां उन्होंने पहले साल 940/1600 अंक हासिल किए।
2012: कॉलेज का मान्यता रद्द होने के बाद, छात्रों को उज्जैन के शासकीय स्वासशी धन्वंतरी कॉलेज में ट्रांसफर किया गया। हालांकि, ज़ैद को प्रवेश नहीं दिया गया, क्योंकि उनके 12वीं में अंग्रेजी नहीं थी।
2012 में ही: कॉलेज ने ज़ैद को “प्रोविजनल एडमिशन” दिया, यह शर्त रखी कि वे 12वीं में अंग्रेजी पास करें। ज़ैद ने 2013 में एमपी बोर्ड और NIOS से अंग्रेजी पास की।
2014: हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, जिसके बाद ज़ैद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणियाँ
“अदालत की गलती से कोई पीड़ित नहीं होगा”: जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि ज़ैद ने 6 साल की पढ़ाई पूरी कर ली थी और इंटर्नशिप भी की थी। ऐसे में उन्हें डिग्री से वंचित करना “न्याय के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ” है।
“प्रोविजनल एडमिशन मान्य होगा”: कोर्ट ने कहा कि कॉलेज ने खुद ज़ैद को अंग्रेजी पास करने का मौका दिया था, इसलिए उनकी योग्यता “सुधर गई”।
हाई कोर्ट की आलोचना: “छात्र की मेहनत को नज़रअंदाज़ करना अन्याय था। अदालत को लचीला दृष्टिकोण अपनाना चाहिए था।”
फैसले का असर
ज़ैद शेख को अब उज्जैन के कॉलेज से B.A.M.S. डिग्री मिलेगी।
इस केस से उन हज़ारों छात्रों को राहत मिलेगी, जो तकनीकी शर्तों की वजह से शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
प्रतिक्रियाएँ
ज़ैद शेख: “मैंने 6 साल संघर्ष किया। आज मेरा विश्वास न्याय प्रणाली में बढ़ा है।”
शिक्षाविद् डॉ. राजेश्वरी मिश्रा: “यह फैसला शैक्षणिक नियमों में मानवीय पहलू को प्राथमिकता देने का संदेश देता है।”
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